निवेश करने से मत डरो
...तो फायदा भी होगा
...होगी परेशानी
कर के आगे सब बेअसर!
इससे टैक्स ढांचा सरल बनेगा व करदाता बढ़ेंगे। स्लैब में बदलाव का खास फायदा उन नौकरीपेशा लोगों को होगा, जो छठे वेतन आयोग के बाद टैक्स के दायरे में आ गए थे। व्यापारी वर्ग को कम फायदा नजर आ रहा है। इसके लागू होने से कागजी काम घटेगा। होम लोन पर ब्याज में कर छूट से हाउसिंग सेक्टर को फायदा होगा।
सुरजीत सिंह निदेशक, विकास अध्ययन संस्थान, जयपुर
 
...तो फायदा भी होगा
डायरेक्ट टैक्स कोड में आयकर की दरें अंकित कर देने से अब वित्त बेल पेश करने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

डीटीसी में रीजनेबल टैक्स रेट का प्रारूप रखा गया है। इससे कर चोरी में घटेगी और सरकारी खजाना भरेगा।

नए प्लांट-मशीनरी लगाने वालों को घिसाई भत्ते के साथ-साथ 20 प्रतिशत अतिरिक्त इनिशियल डेप्रिसिएशन प्लांट और मशीनरी भत्ता भी मिलेगा। इससे उद्योगों में तकनीकी विकास होगा।

कोड में दान के तीन विकल्प दिए गए हैं। इसमें करदाताओं को 125, 100 और 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसे गैर लाभकारी संस्थाओं, चेरिटेबल ट्रस्ट के लिए निवेश नियमों में बदलाव से संस्थाओं की आमदनी बढेगी।

लघु उद्योगों में एक करोड़ की बिक्री पर बिना बही-खाता रखे कर दे सकेंगे। अब कुल बिक्री का 8 प्रतिशत ही लघु उद्योगपति की आय मानी जाएगी। इसी पर आयकर देना होगा। छूट की सीमा तय होगी और 10 फीसदी कर लागू होगा।

नियमों के प्रावधानों से करदाताओं को व्यापारिक आय गणना में मदद मिलेगी।

कोड में कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का मूल्यांकन 2000 से किया जाएगा न कि वर्तमान में लागू 1981 के हिसाब से। इससे कैपिटल गेन लेने वालों को फायदा होगा।

टैक्स कोड की धारा 74 के अनुसार सरकार विशेष टैक्स फ्री बॉण्ड निकालेगी जिनसे करदाता लाभ ले सकेंगे।

पूंजीगत लाभ पर कर बचाने की सीमा तीन साल बढ़ाई गई है। अब जिस वर्ष में पंूजीगत लाभ मिला है, उसे छोड़कर अगले तीन साल में निवेश कर सकेंगे।

कोड के नियम कुछ ऎसे हैं कि सामाजिक सुरक्षा का लाभ स्वत: ही मिल जाएगा। अब ईईटी की वजह से निश्चित तरह के निवेश पर कर में छूट मिलेगी, लेकिन धन की निकासी पर कर लगेगा। इससे निवेशक निकासी से बचेंगे, निवेश की प्रवृत्ति बढेगी, अर्थव्यवस्था पर आर्थिक मंदी जैसी दबाव नाकाम होंगे।