डीटीसी मूल स्वरूप में लागू होता तो क्रांतिकारी परिवर्तन होता। इससे कर ढांचा सरल होने व करदाता बढ़ने की उम्मीद है। महिलाओं को छूट नहीं देने को कुछ लोग गलत मान सकते है पर सैद्धांतिक तौर पर ठीक है। इसकी खामियां बाद में पता लगेगी। स्लैब्स में परिवर्तन नौकरीपेशा के लिए अच्छा है। व्यक्तिगत करदाताओं को फायदा होगा। किशोर खेतान पूर्व प्रमुख, सीआईआई राजस्थान
निवेश करने से मत डरो
डीटीसी निवेशको फायदा देने का प्रावधान रखता है। टैक्स छूट पाने के लिए अप्रूव्ड फंडों और इंश्योरेंस स्कीमों में निवेश अब 1.20 लाख रूपए की जगह 1.50 लाख रूपए तक किया जा सकेगा।
अभी अप्रूव्ड फंडों व इंश्योरेंस स्कीमों में 1 लाख और इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड्स में 20 हजार रूपए तक का निवेश किया जा सकता है। हेल्थ कवर व ट्यूशन फीस में 50 हजार रूपए निवेश पर टैक्स छूट ाहेगी। अब होम लोन के ब्याज और अप्रूव्ड फंडों और इंश्योरेंस स्कीमों में निवेश के जरिए 3 लाख रूपए का टैक्स फ्री निवेश किया जा सकेगा।
हाउसिंग लोन में चुकाए 1.50 लाख रूपए तक के ब्याज पर छूट जारी रहेगी। लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स जीरो बरकरार रहेगा लेकिन शॉर्टटर्म गेन्स के 50 फीसदी हिस्से पर टैक्स से छूट मिलेगी। बाकी 50 फीसदी हिस्से पर इनकम टैक्स स्लैब के तहत कर लगेगा। ऎसे में शॉर्टटर्म गेन्स पर 5, 10 और 15 फीसदी टैक्स दर होंगी। इससे छोटे निवेशक फायदे में रहेंगे।