डीटीसी महिला वर्ग को टैक्स में छूट पर चुप है। फिलहाल महिला वर्ग को 1.90 लाख रूपए तक की कमाई पर टैक्स नहीं देना होता। Read More
देश में दो खास वर्ग ऎसे हैं, जिनके लिए टैक्स छूट के विशेष प्रावधान हैं। महिला वर्ग पर डीटीसी चुप है लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को राहत का इशारा कर रहा है। Read More
डीटीसी में कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी करने का प्रस्ताव है। उन पर कोई सरचार्ज या सेस नहीं लगेगा। Read More
आम आयकर दाता को फिलहाल 80सी के तहत एक लाख रूपए तक की बचत या निवेश में कर छूट हासिल है। नए कोड में इसे बढ़ाकर 3 लाख रूपए किया जाएगा। Read More
निवेश करने से मत डरो
...तो फायदा भी होगा
...होगी परेशानी
कर के आगे सब बेअसर!
यह भविष्य के लिए विजन व पॉलिसी डाक्यूमेट की तरह काम करेगा। इस कोड में लचीलेपन की जरूरत है। नौकरीपेशा के लिए अच्छा है। टैक्स स्लैब्स में लचीलापन जरूरी है। समय के साथ इसमें बदलाव करते रहना होगा। इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव की लंबे अर्से से जरूरत महसूस की जा रही थी। डीटीसी बेहतर विकल्प है।
अल्पना कटेजा
प्रोफसर, अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
 
डीटीसी मूल स्वरूप में लागू होता तो क्रांतिकारी परिवर्तन होता। इससे कर ढांचा सरल होने व करदाता बढ़ने की उम्मीद है। महिलाओं को छूट नहीं देने को कुछ लोग गलत मान सकते है पर सैद्धांतिक तौर पर ठीक है। इसकी खामियां बाद में पता लगेगी। स्लैब्स में परिवर्तन नौकरीपेशा के लिए अच्छा है। व्यक्तिगत करदाताओं को फायदा होगा।
किशोर खेतान पूर्व प्रमुख, सीआईआई
राजस्थान
 
पांच दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट की जगह लेगा डीटीसी
वर्ष 2012 से अमल में लाए जाने वाले डीटीसी के बारे में सरकार की राय है कि इससे टैक्स चोरी रूकेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विजन डॉक्यूमेंट की तरह काम करेगा।
देश में टैक्स प्रक्रिया को समान और सरल बनाने की कवायद के तहत केन्द्र सरकार ने हाल में लोकसभा में डायरेक्ट टैक्स कोड बिल (डीटीसी) पेश किया, जो 1961 के इनकम टैक्स एक्ट की जगह लेगा। नई टैक्स प्रकिया अपनाने की मांग लंबे अर्से से थी, जिसे पूरा करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।

एक अप्रेल 2012 से अमल में आने वाले डीटीसी से आम आदमी के मुकाबले कारोबारियों और खास वर्ग को अधिक फायदा होगा। वैसे हर वर्ग पहले से अधिक बचत कर पाएगा। हालांकि पांच से छह लाख की आमदनी वाले करदाताओं पर दबाव बढ़ेगा। 10 लाख से ज्यादा आय वालों पर कर का दबाव तुलनात्मक रूप से कम पडेगा। आयकर की धारा 80सी के तहत कर छूट योग्य आय एक लाख रूपए से तीन लाख रूपए करने का प्रस्ताव है। पांच लाख वार्षिक आय वाला टैक्स छूट के लिए 3 लाख रूपए निवेश करे तो उसके पास खर्चे लायक पैसा भी नहीं बचेगा।

डीटीसी के तहत इफेक्टिव टैक्स रेट आम करदाताओं के लिए 5-6 फीसदी होगी। ऊपर की स्लैब में आने वाले करदाताओं को सर्वाधिक फायदा मिलने से ऎसी कंपनियां भी फायदे में रहेंगी, जो इस वर्ग परिवारों की जरूरतें पूरी करती हैं। इनमें एफएमसीजी, एंटरटेनमेंट, रीटेल, वित्तीय सेवा, लाइफ स्टाइल कंपनियां शामिल है। दूसरी ओर डीटीसी से रियल्टी और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को भी नुकसान होगा।